SANSKRIT SHABDA PRAYOG
By SanskritLearn
बालक शब्द-रूप एवं उसका प्रयोग संस्कृत भाषा में शब्द-रूपों का विशेष महत्व है। किसी भी संज्ञा का वाक्य में प्रयोग उसके विभक्ति-रूप के अनुसार होता है। यहाँ 'बालक' शब्द के रूप तथा उनके प्रयोग को सरल उदाहरणों सहित प्रस्तुत किया जा रहा है। बालक शब्द-रूप (पुल्लिङ्ग, अकारान्त) प्रथमा: बालकः, बालकौ, बालकाः द्वितीया: बालकम्, बालकौ, बालकान् तृतीया: बालकेन, बालकाभ्याम्, बालकैः चतुर्थी: बालकाय, बालकाभ्याम्, बालकेभ्यः पञ्चमी: बालकात्, बालकाभ्याम्, बालकेभ्यः षष्ठी: बालकस्य, बालकयोः, बालकानाम् सप्तमी: बालके, बालकयोः, बालकेषु सम्बोधन: हे बालक, हे बालकौ, हे बालकाः विभक्तियों का प्रयोग 1. प्रथमा विभक्ति (कर्ता) बालकः पठति। (लड़का पढ़ता है।) 2. द्वितीया विभक्ति (कर्म) अहं बालकम् पश्यामि। (मैं लड़के को देखता हूँ।) 3. तृतीया विभक्ति (करण) बालकेन पत्रं लिखितम्। (लड़के द्वारा पत्र लिखा गया।) 4. चतुर्थी विभक्ति (सम्प्रदान) अहं बालकाय पुस्तकं ददामि। (मैं लड़के को पुस्तक देता हूँ।) 5. पञ्चमी विभक्ति (अपादान) बालकात् पुस्तकं गृह्णामि। (मैं लड़के से पुस्तक लेता हूँ।) 6. षष्ठी विभक्ति (सम्बन्ध) बालकस्य पुस्तकम् अस्ति। (यह लड़के की पुस्तक है।) 7. सप्तमी विभक्ति (अधिकरण) बालके विश्वासः अस्ति। (लड़के में विश्वास है।) 8. सम्बोधन हे बालक! अत्र आगच्छ। (हे लड़के! यहाँ आओ।) निष्कर्ष: 'बालक' शब्द के रूपों का अध्ययन करने से संस्कृत की विभक्तियों और उनके प्रयोग को समझना सरल हो जाता है।