अव्ययीभाव, तत्पुरुष एवं द्वन्द्व समास का निर्णय | अभ्यास सहित
By SanskritLearn
अव्ययीभाव, तत्पुरुष एवं द्वन्द्व समास का निर्णय : अभ्यास
समास संस्कृत व्याकरण का एक महत्वपूर्ण विषय है। समस्त पद का सही समास-भेद पहचानना (समास-निर्णय) विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है। नीचे अभ्यास हेतु कुछ उदाहरण दिए जा रहे हैं।
अव्ययीभाव समास
परिभाषा:
जिस समास का पूर्वपद अव्यय हो तथा समस्त पद भी अव्यय बन जाए, वहाँ अव्ययीभाव समास होता है।
समास-निर्णय कीजिए
- यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार
- प्रतिदिनम् = प्रत्येक दिन
- यथाकालम् = समय के अनुसार
- उपगृहम् = घर के समीप
- सहर्षम् = हर्ष के साथ
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तत्पुरुष समास
परिभाषा:
जिस समास में उत्तरपद प्रधान होता है तथा दोनों पदों के मध्य किसी कारक की विभक्ति का लोप होता है, वहाँ तत्पुरुष समास होता है।
समास-निर्णय कीजिए
- राजपुरुषः = राज्ञः पुरुषः
- ग्रामगमनम् = ग्रामं गमनम्
- वनवासः = वने वासः
- हस्तलिखितम् = हस्तेन लिखितम्
- देवालयः = देवस्य आलयः
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द्वन्द्व समास
परिभाषा:
जिस समास में दोनों पद समान रूप से प्रधान हों तथा विग्रह में 'च' का प्रयोग हो, वहाँ द्वन्द्व समास होता है।
समास-निर्णय कीजिए
- रामलक्ष्मणौ = रामः च लक्ष्मणः च
- माता-पितरौ = माता च पिता च
- सुखदुःखे = सुखं च दुःखं च
- दिनरात्रे = दिनं च रात्रिः च
- गुरुशिष्यौ = गुरुः च शिष्यः च
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अभ्यास प्रश्न
निम्नलिखित समस्त पदों का समास-भेद लिखिए—
- यथाविधि
- राजपुत्रः
- मातापिता
- प्रत्यक्षम्
- वनगमनम्
- सुखदुःखम्
- उपनगरम्
- देवदत्तः
- दिनरात्रम्
- यथाशास्त्रम्
उत्तर
- यथाविधि — अव्ययीभाव
- राजपुत्रः — तत्पुरुष
- मातापिता — द्वन्द्व
- प्रत्यक्षम् — अव्ययीभाव
- वनगमनम् — तत्पुरुष
- सुखदुःखम् — द्वन्द्व
- उपनगरम् — अव्ययीभाव
- देवदत्तः — तत्पुरुष
- दिनरात्रम् — द्वन्द्व
- यथाशास्त्रम् — अव्ययीभाव
निष्कर्ष
समास-निर्णय के लिए यह समझना आवश्यक है कि समस्त पद में कौन-सा पद प्रधान है। यदि पूर्वपद अव्यय हो तो अव्ययीभाव, उत्तरपद प्रधान हो तो तत्पुरुष और दोनों पद समान रूप से प्रधान हों तो द्वन्द्व समास होता है।