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अव्ययीभाव, तत्पुरुष एवं द्वन्द्व समास का निर्णय | अभ्यास सहित

By SanskritLearn

अव्ययीभाव, तत्पुरुष एवं द्वन्द्व समास का निर्णय : अभ्यास

समास संस्कृत व्याकरण का एक महत्वपूर्ण विषय है। समस्त पद का सही समास-भेद पहचानना (समास-निर्णय) विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है। नीचे अभ्यास हेतु कुछ उदाहरण दिए जा रहे हैं।

अव्ययीभाव समास

परिभाषा:

जिस समास का पूर्वपद अव्यय हो तथा समस्त पद भी अव्यय बन जाए, वहाँ अव्ययीभाव समास होता है।

समास-निर्णय कीजिए

  1. यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार
  2. प्रतिदिनम् = प्रत्येक दिन
  3. यथाकालम् = समय के अनुसार
  4. उपगृहम् = घर के समीप
  5. सहर्षम् = हर्ष के साथ

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तत्पुरुष समास

परिभाषा:

जिस समास में उत्तरपद प्रधान होता है तथा दोनों पदों के मध्य किसी कारक की विभक्ति का लोप होता है, वहाँ तत्पुरुष समास होता है।

समास-निर्णय कीजिए

  1. राजपुरुषः = राज्ञः पुरुषः
  2. ग्रामगमनम् = ग्रामं गमनम्
  3. वनवासः = वने वासः
  4. हस्तलिखितम् = हस्तेन लिखितम्
  5. देवालयः = देवस्य आलयः

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द्वन्द्व समास

परिभाषा:

जिस समास में दोनों पद समान रूप से प्रधान हों तथा विग्रह में 'च' का प्रयोग हो, वहाँ द्वन्द्व समास होता है।

समास-निर्णय कीजिए

  1. रामलक्ष्मणौ = रामः च लक्ष्मणः च
  2. माता-पितरौ = माता च पिता च
  3. सुखदुःखे = सुखं च दुःखं च
  4. दिनरात्रे = दिनं च रात्रिः च
  5. गुरुशिष्यौ = गुरुः च शिष्यः च

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अभ्यास प्रश्न

निम्नलिखित समस्त पदों का समास-भेद लिखिए—

  1. यथाविधि
  2. राजपुत्रः
  3. मातापिता
  4. प्रत्यक्षम्
  5. वनगमनम्
  6. सुखदुःखम्
  7. उपनगरम्
  8. देवदत्तः
  9. दिनरात्रम्
  10. यथाशास्त्रम्

उत्तर

  1. यथाविधि — अव्ययीभाव
  2. राजपुत्रः — तत्पुरुष
  3. मातापिता — द्वन्द्व
  4. प्रत्यक्षम् — अव्ययीभाव
  5. वनगमनम् — तत्पुरुष
  6. सुखदुःखम् — द्वन्द्व
  7. उपनगरम् — अव्ययीभाव
  8. देवदत्तः — तत्पुरुष
  9. दिनरात्रम् — द्वन्द्व
  10. यथाशास्त्रम् — अव्ययीभाव

निष्कर्ष

समास-निर्णय के लिए यह समझना आवश्यक है कि समस्त पद में कौन-सा पद प्रधान है। यदि पूर्वपद अव्यय हो तो अव्ययीभाव, उत्तरपद प्रधान हो तो तत्पुरुष और दोनों पद समान रूप से प्रधान हों तो द्वन्द्व समास होता है।