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मनस् और राजन् शब्दरूप | सभी विभक्तियों के अर्थ सहित संस्कृत शब्दरूप[CLASS 9,CLASS 10}

मनस् और राजन् शब्द के सम्पूर्ण शब्दरूप एकवचन, द्विवचन और बहुवचन में। सभी विभक्तियों के संस्कृत एवं हिन्दी अर्थ, उदाहरण और परीक्षा-उपयोगी जानकारी।

By SanskritLearn

मनस् — नपुंसकलिङ्ग, स्-अन्त शब्द

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन विभक्ति का अर्थ प्रथमा- मनः -मनसी -मनांसि ---कर्ता / जो कार्य करता है/ने द्वितीया -मनः मनसी -मनांसि--- कर्म / जिस पर कार्य हो/को तृतीया- मनसा- मनोभ्याम्- मनोभिः--- करण / के द्वारा, के साथ चतुर्थी- मनसे- मनोभ्याम्- मनोभ्यः ---सम्प्रदान / के लिए, को पञ्चमी- मनसः- मनोभ्याम्- मनोभ्यः--- अपादान / से, अलग होने का भाव षष्ठी -मनसः- मनसोः- मनसाम् ---सम्बन्ध / का, के, की सप्तमी -मनसि -मनसोः -मनःसु --अधिकरण / में, पर सम्बोधन -मनः- मनसी -मनांसि --पुकारने या सम्बोधित करने के लिए उदाहरण मनः प्रसन्नम् अस्ति। — मन प्रसन्न है। अहं मनसा चिन्तयामि। — मैं मन से विचार करता हूँ। मनसि शुभविचाराः भवन्तु। — मन में शुभ विचार हों।

ध्यान दें: ‘मनस्’ नपुंसकलिङ्ग होने के कारण इसकी प्रथमा और द्वितीया के रूप समान होते हैं।

२. राजन् शब्दरूप

राजन् — पुंल्लिङ्ग, नकारान्त शब्द

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन विभक्ति का अर्थ प्रथमा -राजा- राजानौ- राजानः. ---- कर्ता / जो कार्य करता है/ने द्वितीया- राजानम्- राजानौ- राज्ञः-------- कर्म / जिस पर कार्य हो/को तृतीया-- राज्ञा -राजभ्याम्- राजभिः------ करण / के द्वारा, के साथ चतुर्थी- राज्ञे -राजभ्याम् -राजभ्यः------ सम्प्रदान / के लिए, को पञ्चमी- राज्ञः- राजभ्याम् -राजभ्यः------ अपादान / से, अलग होने का भाव षष्ठी -राज्ञः- राज्ञोः -राज्ञाम् --------- सम्बन्ध / का, के, की सप्तमी -राज्ञि -राज्ञोः -राजसु ----------अधिकरण / में, पर सम्बोधन- राजन् -राजानौ- राजानः------- पुकारने या सम्बोधित करने के लिए उदाहरण राजा प्रजाः पालयति। — राजा प्रजा का पालन करता है। प्रजाः राजानम् अभिवादयन्ति। — प्रजा राजा का अभिवादन करती है। राज्ञा न्यायः कृतः। — राजा के द्वारा न्याय किया गया। राज्ञः आदेशः सर्वैः पालनीयः। — राजा का आदेश सभी के द्वारा पालन करने योग्य है। राज्ञि जनाः विश्वासं कुर्वन्ति। — राजा में लोग विश्वास करते हैं। 📚 सात विभक्तियों के अर्थ एक दृष्टि में विभक्ति मुख्य अर्थ सामान्य प्रश्न प्रथमा कर्ता कौन? द्वितीया कर्म किसको? / क्या? तृतीया करण / सह किससे? / किसके द्वारा? चतुर्थी सम्प्रदान किसके लिए? / किसको? पञ्चमी अपादान किससे? / कहाँ से? षष्ठी सम्बन्ध किसका? / किसकी? / किसके? सप्तमी अधिकरण कहाँ? / किसमें? / किस पर? सम्बोधन सम्बोधन हे! विद्यार्थियों के लिए स्मरणीय सूत्र

प्रथमा — कर्ता द्वितीया — कर्म तृतीया — करण चतुर्थी — सम्प्रदान पञ्चमी — अपादान षष्ठी — सम्बन्ध सप्तमी — अधिकरण सम्बोधन — पुकारना

Tags:#मनस् शब्दरूप राजन् शब्दरूप संस्कृत शब्दरूप विभक्ति संस्कृत व्याकरण नकारान्त शब्द स्-अन्त शब्द Class 9 Sanskrit Class 10 Sanskrit