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तव्यत् तथा अनीयर् प्रत्यय | CBSE Class 10 संस्कृत
By SanskritLearn
तव्यत् तथा अनीयर् प्रत्यय (CBSE Class 10)
संस्कृत में कृत् प्रत्यय धातु में जुड़ते हैं। इनमें तव्यत् तथा अनीयर् महत्वपूर्ण प्रत्यय हैं। ये दोनों प्रत्यय कर्तव्यता (करना चाहिए / योग्य) का बोध कराते हैं।
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1. तव्यत् प्रत्यय
जब किसी धातु में तव्यत् प्रत्यय लगता है, तब वह शब्द “करने योग्य” अथवा “करना चाहिए” का अर्थ देता है।
उदाहरण
- पठ् + तव्यत् = पठितव्यः
(पढ़ा जाना चाहिए)
- गम् + तव्यत् = गन्तव्यः
(जाना चाहिए)
- कृ + तव्यत् = कर्तव्यः
(किया जाना चाहिए)
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रूप (पठितव्य)
| लिङ्ग | रूप |
|---|---|
| पुंल्लिङ्ग | पठितव्यः[पु.बालक] |
| स्त्रीलिङ्ग | पठितव्या [स्त्री.लता] |
| नपुंसकलिङ्ग | पठितव्यम् [नपुंसक लिङ फल] |
प्रयोग
- बालकैः पाठः पठितव्यः।
- बालिकाभिः गीता पठितव्या।
- फलं भक्षितव्यम्।
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2. अनीयर् प्रत्यय
जब धातु में अनीयर् प्रत्यय लगता है, तब भी “करने योग्य” अथवा “करना चाहिए” का अर्थ होता है।
उदाहरण
- पठ् + अनीयर् = पठनीयः
(पढ़ने योग्य)
- खाद् + अनीयर् = खादनीयः
(खाने योग्य)
- कृ + अनीयर् = करणीयः
(करने योग्य)
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रूप (पठनीय)
| लिङ्ग | रूप |
|---|---|
| पुंल्लिङ्ग | पठनीयः |
| स्त्रीलिङ्ग | पठनीया |
| नपुंसकलिङ्ग | पठनीयम् |
प्रयोग
- एषः पाठः पठनीयः।
- एषा कथा पठनीया।
- एतत् पुस्तकं पठनीयम्।
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तव्यत् और अनीयर् में अन्तर
| तव्यत् | अनीयर् |
|---|---|
| कर्तव्यता का बोध | योग्यता का बोध |
| अधिक “करना चाहिए” | अधिक “करने योग्य” |
उदाहरण—
- कार्यं कर्तव्यम्। (कार्य करना चाहिए)
- एतत् कार्यं करणीयम्। (यह कार्य करने योग्य है)
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परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण उदाहरण
कर्तव्यः, गन्तव्यः, पठितव्यः, करणीयः, पठनीयः, खादनीयः, लेखनीयः।