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वाच्य : परिभाषा, भेद, नियम एवं उदाहरण

By SanskritLearn

वाच्य : परिभाषा, भेद एवं उदाहरण

वाच्य क्या है?

क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात होता है कि वाक्य में कर्ता, कर्म अथवा भाव में से किसकी प्रधानता है, उसे वाच्य कहते हैं।

सरल शब्दों में, वाक्य में किसके अनुसार क्रिया का प्रयोग हुआ है, यही वाच्य कहलाता है।

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वाच्य के भेद

संस्कृत में वाच्य तीन प्रकार के होते हैं—

  1. कर्तृवाच्य
  2. कर्मवाच्य
  3. भाववाच्य

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1. कर्तृवाच्य

जिस वाक्य में कर्ता की प्रधानता होती है तथा क्रिया कर्ता के अनुसार होती है, वहाँ कर्तृवाच्य होता है।

उदाहरण

  • रामः पुस्तकं पठति।
  • छात्रः प्रश्नान् लिखति।
  • बालकः क्रीडति।

विशेषता:

क्रिया कर्ता के लिङ्ग, वचन एवं पुरुष के अनुसार होती है।

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2. कर्मवाच्य

जिस वाक्य में कर्म की प्रधानता होती है तथा क्रिया कर्म के अनुसार होती है, वहाँ कर्मवाच्य होता है।

उदाहरण

  • रामेण पुस्तकं पठ्यते।
  • छात्रेण पत्रं लिख्यते।
  • गुरुणा पाठः शिक्ष्यते।

परिवर्तन

कर्तृवाच्य → कर्मवाच्य

रामः पुस्तकं पठति। → रामेण पुस्तकं पठ्यते।

बालकः फलं खादति। → बालकेन फलं खाद्यते।

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3. भाववाच्य

जहाँ केवल क्रिया या भाव की प्रधानता होती है तथा कर्ता का विशेष महत्व नहीं होता, वहाँ भाववाच्य होता है।

उदाहरण

  • मया गम्यते।
  • त्वया हस्यते।
  • अस्माभिः पठ्यते।

विशेषता

  • भाववाच्य में सामान्यतः अकर्मक धातुओं का प्रयोग होता है।
  • क्रिया सदैव प्रथम पुरुष एकवचन रूप में रहती है।

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वाच्य पहचानने की सरल विधि

वाच्यपहचान
कर्तृवाच्यकर्ता प्रधान होता है
कर्मवाच्यकर्म प्रधान होता है
भाववाच्यकेवल क्रिया या भाव प्रधान होता है

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अभ्यास प्रश्न

निम्नलिखित वाक्यों का वाच्य बताइए—

  1. रामः विद्यालयं गच्छति।
  2. रामेण पत्रं लिख्यते।
  3. मया पठ्यते।
  4. छात्रः प्रश्नं पृच्छति।
  5. गुरुणा पाठः कथ्यते।
  6. त्वया हस्यते।
  7. बालकः फलं खादति।
  8. बालकेन फलं खाद्यते।

उत्तर

  1. कर्तृवाच्य
  2. कर्मवाच्य
  3. भाववाच्य
  4. कर्तृवाच्य
  5. कर्मवाच्य
  6. भाववाच्य
  7. कर्तृवाच्य
  8. कर्मवाच्य

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निष्कर्ष

संस्कृत व्याकरण में वाच्य का अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। वाच्य के माध्यम से यह समझा जाता है कि वाक्य में कर्ता, कर्म अथवा भाव में से किसकी प्रधानता है। कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य के नियमों का नियमित अभ्यास करने से संस्कृत भाषा का ज्ञान अधिक सुदृढ़ होता है।