Script — Devanagari
समास (तत्पुरुष) | CBSE Class 9 संस्कृत
CBSE Class 9 के लिए तत्पुरुष समास के भेद—विभक्ति, नञ्, उपपद और कर्मधारय का सरल विश्लेषण एवं उदाहरण।
2 min read
समास (CBSE Class 9)
संस्कृत में दो या दो से अधिक पदों को मिलाकर संक्षेप में एक पद बनाना समास कहलाता है। समास से भाषा संक्षिप्त, मधुर और प्रभावशाली बनती है।
CBSE Class 9 में मुख्यतः तत्पुरुष समास के ये चार भेद पढ़ाए जाते हैं—
---
1. विभक्ति तत्पुरुष
जिस समास में दोनों पदों के बीच किसी विभक्ति का लोप होता है, उसे विभक्ति तत्पुरुष कहते हैं।
उदाहरण विद्यालय: -विद्याया: आलय राज्ञः पुरुषः → **राजपुरुषः** (षष्ठी तत्पुरुष)
- ग्रामं गमनम् → ग्रामगमनम् (द्वितीया तत्पुरुष)
- हस्तेन लिखितम् → हस्तलिखितम् (तृतीया तत्पुरुष)
- वनात् आगतः → वनागतः (पंचमी तत्पुरुष)
पहचान
विग्रह में विभक्ति दिखाई देती है।
---
2. नञ् तत्पुरुष
जिस समास में पहले पद में न / अ / अन् होकर निषेध (नहीं) का अर्थ हो, उसे नञ् तत्पुरुष कहते हैं।
उदाहरण
- न कार्यम् → अकार्यं
- न धर्मः → अधर्मः
- न न्यायः → अन्यायः
- न उचितम् → अनुचितम्
पहचान
पहले पद में “अ” या “अन” आता है।
---
3. उपपद तत्पुरुष
जब किसी विशेष पद (उपपद) के साथ धातु मिलकर समास बनता है, उसे उपपद तत्पुरुष कहते हैं।
उदाहरण
- कुम्भं करोति → कुम्भकारः
- ग्रामे वसति → ग्रामवासी
- पुस्तकं पठति → पुस्तकपाठी
- सर्वदा---सर्वं ददाति इति
पहचान
एक पद स्थिर होता है और दूसरा धातु या क्रियासम्बन्धी।
---
4. कर्मधारय समास
जिस समास में दोनों पद समानाधिकरण हों तथा पहला पद दूसरे की विशेषता बताता हो, उसे कर्मधारय कहते हैं।
उदाहरण
- नीलम् उत्पलम् → नीलोत्पलम्
- महान् पुरुषः → महापुरुषः
- शुभ्रम् वस्त्रम् → शुभ्रवस्त्रम्
- कृष्णः सर्पः → कृष्णसर्पः
पहचान
पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य होता है।
---
समास पहचानने की सरल विधि
- विभक्ति दिखे → विभक्ति तत्पुरुष
- “अ/अन” से निषेध हो → नञ् तत्पुरुष
- उपपद + धातु हो → उपपद तत्पुरुष
- विशेषण + विशेष्य हो → कर्मधारय
---
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण उदाहरण
राजपुरुषः, ग्रामगमनम्, अकार्यं, अधर्मः, कुम्भकारः, देवालयः, महापुरुषः, नीलोत्पलम्।