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Class 9

What is the explanation of chapter one... in sanskrit book of class 9th

Question · asked by Sonam

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Answer · SanskritLearn team · 18 Sept 2026

कक्षा 9 संस्कृत — शारदा प्रथमः पाठः — सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम् श्लोक, सरल हिन्दी अर्थ एवं अभ्यास-प्रश्नोत्तर

पुस्तक: शारदा कक्षा: 9 विषय: संस्कृत पाठ: 1 — सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम् कवि: पण्डित वासुदेव-शास्त्री-द्विवेदी पाठ-परिचय

संस्कृत भारतदेशस्य अमूल्या सम्पत्तिः अस्ति। अस्मिन् भारतीयानां ज्ञानवैभवं सञ्चितम् अस्ति। संस्कृतस्य अध्ययनात् मानवः सुसंस्कृतः भवति। कविना संस्कृतभाषायाः महत्त्वं वर्णयितुं सुन्दरं गीतं प्रस्तुतम् अस्ति। गीतस्य षट् पद्येषु संस्कृतभाषायाः महत्त्वं, भारतीयैकता, ज्ञानं, शान्तिः, सद्गुणाः, पुरुषार्थाः तथा पूर्वजानां यशः इत्यादयः विषयाः वर्णिताः सन्ति।

१. पद्यानि तथा हिन्दी-अर्थः पद्यम् — १

भारतीयैकतासाधकं संस्कृतम्। भारतीयत्वसम्पादकं संस्कृतम्। ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शकं संस्कृतम्। सर्वदानन्दसन्दोहदं संस्कृतम्॥ १॥

हिन्दी-अर्थः— संस्कृत भारतीयों की एकता को सिद्ध करने वाली है। संस्कृत भारतीयता को प्रदान करने वाली है। संस्कृत ज्ञान-समूह के प्रकाश को दिखाने वाली है तथा सदा आनन्द की परम्परा प्रदान करने वाली है।

पद्यम् — २

सर्वमस्तिष्कसंस्कारकं संस्कृतम्। सर्ववाणीपरिष्कारकं संस्कृतम्। सत्पथप्रेरणादायकं संस्कृतम्। सद्गुणग्रामसन्धायकं संस्कृतम्॥ २॥

हिन्दी-अर्थः— संस्कृत सभी के मस्तिष्क को संस्कारित करने वाली है। यह सभी की वाणी को परिष्कृत करने वाली है। यह मनुष्य को सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है तथा सद्गुणों के समूह को जोड़ने वाली है।

पद्यम् — ३

विश्वबन्धुत्वविस्तारकं संस्कृतम्। सर्वभूतैकताकारकं संस्कृतम्। सर्वतः शान्तिसंस्थापकं संस्कृतम्। पञ्चशीलप्रतिष्ठापकं संस्कृतम्॥ ३॥

हिन्दी-अर्थः— संस्कृत विश्व में भाईचारे की भावना का विस्तार करने वाली है। यह सभी प्राणियों में एकता स्थापित करने वाली है। यह सभी ओर शान्ति की स्थापना करती है तथा पञ्चशील की प्रतिष्ठा करने वाली है।

पद्यम् — ४

त्यागसन्तोषसेवाव्रतं संस्कृतम्। विश्वकल्याणनिष्ठायुतं संस्कृतम्। ज्ञानविज्ञानसम्मेलनं संस्कृतम्। भुक्तिमुक्तिद्वयोद्वेलनं संस्कृतम्॥ ४॥

हिन्दी-अर्थः— संस्कृत त्याग, सन्तोष और सेवा के व्रत से युक्त है। यह विश्वकल्याण की भावना से युक्त है। संस्कृत ज्ञान और विज्ञान का सम्मेलन है तथा भोग और मोक्ष दोनों के उत्कर्ष का मार्ग दिखाने वाली है।

पद्यम् — ५

धर्मकामार्थमोक्षप्रदं संस्कृतम्। ऐहिकामुष्मिकोत्कर्षदं संस्कृतम्। कर्मदं ज्ञानदं भक्तिदं संस्कृतम्। सत्यनिष्ठं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्॥ ५॥

हिन्दी-अर्थः— संस्कृत धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान करने वाली है। यह इस लोक और परलोक दोनों में उत्कर्ष प्रदान करती है। यह कर्म, ज्ञान और भक्ति प्रदान करने वाली है। इसलिए संस्कृत सत्यनिष्ठ, कल्याणकारी और सुन्दर है।

पद्यम् — ६

शब्दलालित्यलीलावनं संस्कृतम्। चारुमाधुर्यधारागृहं संस्कृतम्। विश्वचेतश्चमत्कारकं संस्कृतम्। पूर्वजानां यशः स्मारकं संस्कृतम्॥ ६॥

हिन्दी-अर्थः— संस्कृत शब्दों के लालित्य की क्रीड़ास्थली है। यह सुन्दरता और मधुरता की धारा का आनन्ददायक भवन है। संस्कृत सम्पूर्ण विश्व के चित्त को चमत्कृत करने वाली है तथा हमारे पूर्वजों के यश का स्मारक है।

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