Script — Devanagari
षष्ठ:पाठ:-मन:पूतं समाचरेत्
कक्षा 9 CBSE संस्कृत के प्रमुख प्रेरणादायक श्लोक हिन्दी अर्थ सहित। विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा संस्कृत-प्रेमियों के लिए सरल एवं ज्ञानवर्धक अध्ययन सामग्री।
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कक्षा 9 संस्कृत (श्लोकाः) — अर्थ सहित
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१. **दृष्टिपूतं न्यसेत्पादं वस्त्रपूतं जलं पिबेत्।
सत्यपूतां वदेद्वाचं मनःपूतं समाचरेत्॥**
अर्थ (हिन्दी): मनुष्य को देखकर ही पैर रखना चाहिए, छानकर जल पीना चाहिए, सत्य से युक्त वचन बोलना चाहिए तथा शुद्ध मन से प्रत्येक कार्य करना चाहिए।
२. **धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः।
धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्॥**
अर्थ (हिन्दी): धैर्य, क्षमा, आत्मसंयम, चोरी न करना, पवित्रता, इन्द्रियों पर नियंत्रण, बुद्धि, विद्या, सत्य तथा क्रोध का त्याग—ये दस धर्म के लक्षण हैं।
३. **यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥**
अर्थ (हिन्दी): श्रेष्ठ व्यक्ति जैसा आचरण करता है, अन्य लोग भी वैसा ही करते हैं। वह जिसे आदर्श मानता है, समाज भी उसी का अनुसरण करता है।
४. **अभ्यासेन क्रियाः सर्वाः अभ्यासात् सकलाः कलाः।
अभ्यासाद् ध्यान मौनादि किमभ्यासस्य दुष्करम् ।*
अर्थ (हिन्दी): अभ्यास से सभी कार्य सिद्ध होते हैं। सभी कलाएँ अभ्यास से ही आती हैं। ध्याान और मौन इत्यादि अभ्यास से ही स्थिर रहती है, इसलिए अभ्यास करने वाले के लिए कोई भी काम कठिन नहीं होता है।
५. **प्रारभ्यते न खलु विघ्नभयेन नीचैः।
प्रारभ्य विघ्नविहता विरमन्ति मध्याः। विघ्नैः पुनः पुनरपि प्रतिहन्यमानाः। प्रारभ्य चोत्तमजनाः न परित्यजन्ति॥**
अर्थ (हिन्दी): नीच व्यक्ति विघ्न के भय से कार्य आरम्भ ही नहीं करते। मध्यम व्यक्ति कार्य आरम्भ तो करते हैं, परन्तु बाधा आने पर छोड़ देते हैं। श्रेष्ठ व्यक्ति बार-बार बाधाएँ आने पर भी अपने कार्य को नहीं छोड़ते।
६. **उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीः।
दैवेन देयमिति कापुरुषा वदन्ति। दैवं निहत्य कुरु पौरुषमात्मशक्त्या। यत्ने कृते यदि न सिध्यति कोऽत्र दोषः॥**
अर्थ (हिन्दी): उद्योगी और परिश्रमी पुरुष के पास ही लक्ष्मी आती है। कायर लोग कहते हैं कि सब कुछ भाग्य से मिलता है। इसलिए भाग्य के भरोसे न रहकर अपनी शक्ति से पुरुषार्थ करो। पूरा प्रयास करने पर भी यदि सफलता न मिले, तो उसमें कोई दोष नहीं है।
७. **पुराणमित्येव न साधु सर्वं न चापि काव्यं नवमित्यवद्यम्।
सन्तः परीक्ष्यान्यतरद्भजन्ते मूढः परप्रत्ययनेयबुद्धिः॥**
अर्थ (हिन्दी): केवल पुराना होने से कोई वस्तु अच्छी नहीं होती और केवल नया होने से कोई वस्तु बुरी नहीं होती। बुद्धिमान व्यक्ति परीक्षा करके ही किसी वस्तु को स्वीकार करते हैं, जबकि मूर्ख दूसरों की बातों पर ही विश्वास कर लेते हैं।
८. **सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम्।
वृणुते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव सम्पदः॥**
अर्थ (हिन्दी): बिना विचार किए कोई कार्य नहीं करना चाहिए, क्योंकि अविवेक बड़ी विपत्तियों का कारण बनता है। जो व्यक्ति सोच-समझकर कार्य करता है, गुणों की इच्छुक सम्पत्तियाँ स्वयं उसी को प्राप्त होती हैं।