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Script — Devanagari

कृ, पच्, नी और कृष् धातु के लट् लकार में उभयपदी रूप

संस्कृत व्याकरण में कृ, पच्, नी और कृष् धातुओं के लट् लकार में परस्मैपदी तथा आत्मनेपदी दोनों रूप। विद्यार्थियों और संस्कृत-अध्यापकों के लिए उपयोगी धातुरूप-सामग्री।

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कृ, पच्, नी और कृष् धातु के लट् लकार में उभयपदी रूप

उभयपदी का अर्थ

जिन धातुओं के परस्मैपदी तथा आत्मनेपदी दोनों प्रकार के रूप प्रचलित होते हैं, उन्हें उभयपदी धातु कहते हैं।

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१. कृ धातु — करना

परस्मैपदी — लट् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषकरोतिकुरुतःकुर्वन्ति
मध्यम पुरुषकरोषिकुरुथःकुरुथ
उत्तम पुरुषकरोमिकुर्वःकुर्मः

आत्मनेपदी — लट् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषकुरुतेकुर्वातेकुर्वते
मध्यम पुरुषकुरुषेकुर्वाथेकुरुध्वे
उत्तम पुरुषकुर्वेकुर्वावहेकुर्महे

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२. पच् धातु — पकाना

परस्मैपदी — लट् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपचतिपचतःपचन्ति
मध्यम पुरुषपचसिपचथःपचथ
उत्तम पुरुषपचामिपचावःपचामः

आत्मनेपदी — लट् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषपचतेपचेतेपचन्ते
मध्यम पुरुषपचसेपचेथेपचध्वे
उत्तम पुरुषपचेपचावहेपचामहे

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३. नी धातु — ले जाना

परस्मैपदी — लट् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषनयतिनयतःनयन्ति
मध्यम पुरुषनयसिनयथःनयथ
उत्तम पुरुषनयामिनयावःनयामः

आत्मनेपदी — लट् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषनयतेनयेतेनयन्ते
मध्यम पुरुषनयसेनयेथेनयध्वे
उत्तम पुरुषनयेनयावहेनयामहे

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४. कृष् धातु — हल से जोतना / खेती करना

परस्मैपदी — लट् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषकृषतिकृषतःकृषन्ति
मध्यम पुरुषकृषसिकृषथःकृषथ
उत्तम पुरुषकृषामिकृषावःकृषामः

आत्मनेपदी — लट् लकार

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषकृषतेकृषेतेकृषन्ते
मध्यम पुरुषकृषसेकृषेथेकृषध्वे
उत्तम पुरुषकृषेकृषावहेकृषामहे

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संक्षिप्त परिचय

कृ — करना

पच् — पकाना

नी — ले जाना

कृष् — हल से जोतना / खेती करना

उपर्युक्त धातुओं के लट् लकार में परस्मैपदी एवं आत्मनेपदी दोनों रूप दिए गए हैं। यह सामग्री संस्कृत-व्याकरण के अध्ययन, अध्यापन तथा परीक्षा-अभ्यास के लिए उपयोगी है।

टैग:

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