Script — Devanagari
प्रतिदिन संस्कृत सम्भाषणम् – भागः ४ : गृहे
प्रतिदिन संस्कृत सम्भाषणम् – भाग 4। घर में होने वाला सरल संस्कृत संवाद, हिन्दी अर्थ, शब्दार्थ, दैनिक प्रयोग के वाक्य, अभ्यास, सुभाषित एवं प्रेरणावाक्य सहित। संस्कृत सीखने वाले विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा सभी संस्कृत-प्रेमियों के लिए उपयोगी।
1 min read
प्रतिदिन संस्कृत सम्भाषणम् – भागः ४ गृहे (घर में) संवादः
माता : पुत्र! प्रातःकालः अभवत्। उत्तिष्ठ।
पुत्रः : आम्, अम्ब! इदानीमेव उत्तिष्ठामि।
माता : प्रथमं दन्तधावनं कुरु, ततः स्नानं कुरु।
पुत्रः : आम्। ततः किं कर्तव्यम्?
माता : प्रार्थनां कुरु, अनन्तरं प्रातराशं खाद।
पुत्रः : अद्य प्रातराशे किं अस्ति?
माता : अद्य इडली-साम्भारः तथा फलानि सन्ति।
पुत्रः : उत्तमम्। मम एतत् अतीव रोचते।
माता : शीघ्रं भोजनं कृत्वा विद्यालयं गच्छ।
पुत्रः : आम्, अम्ब! समये एव गच्छामि।
हिन्दी अर्थ
माता: बेटा! सुबह हो गई है। उठो।
पुत्र: जी, माँ! मैं अभी उठता हूँ।
माता: पहले दाँत साफ़ करो, फिर स्नान करो।
पुत्र: जी। उसके बाद क्या करना है?
माता: प्रार्थना करो, फिर नाश्ता करो।
पुत्र: आज नाश्ते में क्या है?
माता: आज इडली-सांभर और फल हैं।
पुत्र: बहुत अच्छा। मुझे यह बहुत पसंद है।
माता: जल्दी भोजन करके विद्यालय जाओ।
पुत्र: जी, माँ! मैं समय पर ही जाऊँगा।
नवीनाः शब्दाः संस्कृतम् हिन्दी माता माता पुत्रः पुत्र प्रातःकालः प्रातःकाल उत्तिष्ठ उठो दन्तधावनम् दाँत साफ़ करना स्नानम् स्नान प्रार्थना प्रार्थना प्रातराशः नाश्ता फलानि फल शीघ्रम् शीघ्र दैनिक-प्रयोग-वाक्यानि सुप्रभातम्। उत्तिष्ठ। दन्तधावनं कुरु। स्नानं कुरु। प्रार्थनां कुरु। प्रातराशं खाद। शीघ्रं आगच्छ। समये गच्छ। अभ्यासः १. संस्कृतेन उत्तरत। माता पुत्रं किं कथयति? प्रातराशे किं अस्ति? पुत्रः कुत्र गच्छति? २. रिक्तस्थानानि पूरयत। प्रथमं __________ कुरु। अद्य __________ तथा फलानि सन्ति। पुत्रः __________ गच्छामि इति वदति। आज का संस्कृत शब्द
प्रातराशः — प्रातःकाल का भोजन (नाश्ता)
उदाहरणम्: अहं प्रतिदिनं प्रातराशं समये खादामि।
आज का सुभाषितम्
मातृदेवो भव। पितृदेवो भव।
भावार्थः: माता और पिता का सम्मान देवतुल्य करना चाहिए।
आज का प्रेरणावाक्यम्
समयपालनं, स्वच्छता, शिष्टाचारश्च सफलजीवनस्य आधाराः सन्ति।