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रामरक्षा स्तोत्र में सप्तविभक्तियों का प्रयोग | संस्कृत व्याकरण

रामरक्षा स्तोत्र के प्रसिद्ध श्लोक में प्रयुक्त सातों विभक्तियों का सरल परिचय। रामः, रामम्, रामेण, रामाय, रामात्, रामस्य और रामे पदों द्वारा सप्तविभक्तियों को समझें।

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रामरक्षा स्तोत्र में सप्तविभक्तियों का प्रयोग

रामरक्षा स्तोत्र में एक अत्यन्त प्रसिद्ध श्लोक है, जिसमें संस्कृत की सातों विभक्तियों का सुन्दर प्रयोग हुआ है। संस्कृत व्याकरण सीखने वाले विद्यार्थियों के लिए यह श्लोक विभक्तियों को समझने का सरल और उपयोगी उदाहरण है।

श्लोकः

रामो राजमणिः सदा विजयते रामं रमेशं भजे। रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः॥ रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहम्। रामे चित्तलयः सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर॥

सप्तविभक्तियों का प्रयोग विभक्तिः श्लोके प्रयुक्त पदम् विभक्ति का प्रयोग प्रथमा -रामः- रामः सदा विजयते द्वितीया- रामम् -रामं भजे तृतीया- रामेण -रामेण अभिहता चतुर्थी -रामाय- रामाय नमः पञ्चमी -रामात् -[-रामात्+न] रामान्नास्ति षष्ठी -रामस्य- रामस्य दासः सप्तमी -रामे -रामे चित्तलयः सम्बोधन-भो राम-भो राम ! मामुद्धर

सरल भावार्थ

श्रीराम सदा विजय प्राप्त करते हैं। मैं रमापति श्रीराम का भजन करता हूँ। श्रीराम के द्वारा राक्षसों की सेना का संहार किया गया। उन श्रीराम को नमस्कार है। श्रीराम से बढ़कर कोई श्रेष्ठ आश्रय नहीं है। मैं श्रीराम का दास हूँ। मेरा चित्त सदा श्रीराम में लीन रहे। हे राम! मेरा उद्धार कीजिए।

विद्यार्थियों के लिए विशेष बिन्दु

राम शब्द के रूपों के माध्यम से सात विभक्तियों को एक ही श्लोक में इस प्रकार पहचान सकते हैं—

रामः → रामम् → रामेण → रामाय → रामात् → रामस्य → रामे --भो राम!

इस प्रकार यह श्लोक संस्कृत व्याकरण में सप्तविभक्तियों के अभ्यास का अत्यन्त सुन्दर उदाहरण है।