Script — Devanagari
स्वर सन्धि (वृद्धि, यण्, अयादि, पूर्वरूप) | CBSE Class 10
2 min read
स्वर सन्धि (CBSE Class 10)
स्वरों के मेल से होने वाले परिवर्तन को स्वर सन्धि कहते हैं। यहाँ चार महत्वपूर्ण स्वर-सन्धियाँ दी जा रही हैं—
---
1. वृद्धि सन्धि
जब अ / आ के बाद ए / ऐ आए, तो दोनों मिलकर ऐ हो जाते हैं। और जब अ / आ के बाद ओ / औ आए, तो दोनों मिलकर औ हो जाते हैं।
नियम
अ/आ + ए/ऐ = ऐ अ/आ + ओ/औ = औ
उदाहरण
- एक + एकः = एकैकः
- सदा + एव = सदैव
- महा + औषधिः = महौषधिः
- जल + ओघः = जलौघः
---
2. यण् सन्धि
जब इ, ई, उ, ऊ, ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर आता है, तो वे क्रमशः य्, व्, र् में बदल जाते हैं।
नियम
इ / ई → य् उ / ऊ → व् ऋ → र्
उदाहरण
- यदि + अपि = यद्यपि
- प्रति + एकम् = प्रत्येकम्
- अनु + एषणम् = अन्वेषणम्
- पितृ + आदेशः = पित्रादेशः
---
3. अयादि सन्धि
जब ए, ऐ, ओ, औ के बाद कोई स्वर आता है, तो वे क्रमशः अय्, आय्, अव्, आव् हो जाते हैं।
नियम
ए → अय् ऐ → आय् ओ → अव् औ → आव्
उदाहरण
- ने + अनम् = नयनम्
- गै + अकः = गायकः
- भो + अनम् = भवनम्
- पौ + अकः = पावकः
---
4. पूर्वरूप सन्धि
जब ए / ओ के बाद अ आता है, तो केवल पहला स्वर (ए / ओ) ही रहता है और दूसरा अ लुप्त हो जाता है। इसे पूर्वरूप सन्धि कहते हैं।
नियम
ए + अ = ए ओ + अ = ओ
उदाहरण
- प्रभो + अस्तु = प्रभोऽस्तु
- हरे + अव = हरेऽव
- विष्णो + अत्र = विष्णोऽत्र
---
स्मरणीय सूत्र
- वृद्धि → ऐ, औ बनता है
- यण् → य्, व्, र् का आदेश
- अयादि → अय्, आय्, अव्, आव् बनता है
- पूर्वरूप → पहला स्वर ही रहता है