Script — Devanagari
संस्कृत धातुओं के अर्थ एवं लट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन रूप
संस्कृत के प्रमुख धातुओं (पठ्, गम्, वद्, भू, क्रीड्, नी, दृश्, शक्, सेव्, लभ्, रुच् आदि) के अर्थ तथा लट् लकार में प्रथम पुरुष एकवचन रूप सरल रूप में पढ़ें। कक्षा 9 एवं 10 के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी।
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प्रमुख धातवः, अर्थ एवं लट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन
संस्कृतभाषायां धातवः क्रियायाः मूलाधाराः सन्ति। प्रत्येक धातु का अपना विशेष अर्थ होता है। यहाँ प्रमुख धातुओं के अर्थ तथा लट् लकार में प्रथम पुरुष एकवचन रूप दिए गए हैं।
परस्मैपदी धातवः
| धातुः | अर्थः | लट् लकारे प्रथम पुरुष एकवचनम् |
|---|---|---|
| पठ् | पढ़ना | पठति |
| गम् | जाना | गच्छति |
| वद् | बोलना | वदति |
| भू | होना | भवति |
| क्रीड् | खेलना | क्रीडति |
| नी | ले जाना | नयति |
| दृश् | देखना | पश्यति |
| शक् | समर्थ होना | शक्नोति |
| ज्ञा | जानना | जानाति |
| अस् | होना | अस्ति |
| कृ | करना | करोति |
| दा | देना | ददाति |
| क्री | खरीदना | क्रीणाति |
| ज्ञा | जानना | जानाति |
| पा (पिब्) | पीना | पिबति। श्रु=सुनना। शृणोति |
---
आत्मनेपदी धातवः
| धातुः | अर्थः | लट् लकारे प्रथम पुरुष एकवचनम् |
|---|---|---|
| सेव् | सेवा करना | सेवते |
| लभ् | प्राप्त करना | लभते |
| रुच् | अच्छा लगना | रोचते |
| मुद् | प्रसन्न होना | मोदते |
| वृध् | बढ़ना | वर्धते |
---
उभयपदी धातवः
| धातुः | अर्थः | लट् लकारे प्रथम पुरुष एकवचनम् |
|---|---|---|
| कृ | करना | करोति / कुरुते |
| पच् | पकाना | पचति / पचते |
| नी | ले जाना | नयति / नयते |
| कृष् | खींचना / खेती करना | कृषति / कृषते |
| हृ | हरना / लेना | हरति / हरते |
| भज् | सेवा करना / भजन करना | भजति / भजते |
इति प्रमुखधातूनां अर्थाः तथा लट् लकारे प्रथमपुरुष-एकवचनरूपाणि।