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Script — Devanagari

प्रतिदिन संस्कृत सम्भाषणम् – भागः ६ : मित्रेण सह

तिदिन संस्कृत सम्भाषणम् – भाग 6। मित्रों के बीच पुस्तकालय और स्वाध्याय पर आधारित सरल संस्कृत संवाद, हिन्दी अर्थ, शब्दार्थ, दैनिक प्रयोग के वाक्य, अभ्यास, सुभाषित एवं प्रेरणावाक्य सहित। कक्षा 9–10 के विद्यार्थियों तथा संस्कृत सीखने वाले सभी पाठकों के लिए उपयोगी।

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प्रतिदिन संस्कृत सम्भाषणम् – भागः ६ मित्रेण सह (मित्र के साथ) संवादः

राहुलः : नमस्ते, मित्र! कुत्र गच्छसि?

विनयः : नमस्ते। अहं पुस्तकालयं गच्छामि।

राहुलः : किमर्थं पुस्तकालयं गच्छसि?

विनयः : अहं संस्कृतस्य पुस्तकं नेतुम् इच्छामि।

राहुलः : उत्तमम्। अहम् अपि त्वया सह गच्छामि।

विनयः : अवश्य। पुस्तकालये बहूनि उत्तमानि पुस्तकानि सन्ति।

राहुलः : तत्र वयं स्वाध्यायमपि करिष्यावः।

विनयः : साधु। स्वाध्यायः सफलतायाः मूलम् अस्ति।

राहुलः : चल, विलम्बं मा कुरु।

विनयः : आम्, शीघ्रं गच्छावः।

हिन्दी अर्थ

राहुल: नमस्ते मित्र! तुम कहाँ जा रहे हो?

विनय: नमस्ते। मैं पुस्तकालय जा रहा हूँ।

राहुल: तुम पुस्तकालय क्यों जा रहे हो?

विनय: मैं संस्कृत की पुस्तक लेना चाहता हूँ।

राहुल: बहुत अच्छा। मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ।

विनय: अवश्य। पुस्तकालय में बहुत-सी अच्छी पुस्तकें हैं।

राहुल: वहाँ हम स्वाध्याय भी करेंगे।

विनय: ठीक है। स्वाध्याय सफलता का मूल है।

राहुल: चलो, देर मत करो।

विनय: हाँ, शीघ्र चलते हैं।

नवीनाः शब्दाः संस्कृतम् हिन्दी मित्रम् मित्र पुस्तकालयः पुस्तकालय पुस्तकम् पुस्तक नेतुम् लेने के लिए इच्छामि मैं चाहता हूँ स्वाध्यायः स्वयं अध्ययन सफलतायाः सफलता का मूलम् आधार विलम्बः देर शीघ्रम् जल्दी दैनिक-प्रयोग-वाक्यानि कुत्र गच्छसि? अहं पुस्तकालयं गच्छामि। किमर्थम् आगतः? अहम् इच्छामि। मया सह आगच्छ। स्वाध्यायं कुरु। विलम्बं मा कुरु। शीघ्रं गच्छावः। अभ्यासः १. संस्कृतेन उत्तरत। विनयः कुत्र गच्छति? सः किमर्थं पुस्तकालयं गच्छति? स्वाध्यायः कस्य मूलम् अस्ति? २. रिक्तस्थानानि पूरयत। अहं ________ गच्छामि। संस्कृतस्य ________ नेतुम् इच्छामि। स्वाध्यायः ________ मूलम् अस्ति। आज का संस्कृत शब्द

स्वाध्यायः — स्वयं अध्ययन करना।

उदाहरणम्: विद्यार्थी प्रतिदिनं स्वाध्यायं करोति।

आज का सुभाषितम्

उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।

भावार्थः: केवल इच्छाएँ करने से कार्य सिद्ध नहीं होते; परिश्रम से ही सफलता मिलती है।

आज का प्रेरणावाक्यम्

सत्सङ्गतिः, स्वाध्यायः, नियमिताभ्यासश्च विद्यार्थिनः प्रगतेः त्रयः आधाराः।