Script — Devanagari
*सेव्, लभ् और रुच् धातु के लट्, लोट् एवं लृट् लकार**
संस्कृत व्याकरण में सेव्, लभ् और रुच् धातुओं के लट्, लोट् एवं लृट् लकार के शुद्ध धातुरूप। विद्यार्थियों और संस्कृत-अध्यापकों के लिए उपयोगी अभ्यास-सामग्री।
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१. सेव् धातु — सेवा करना
लट् लकार — वर्तमानकाल
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | सेवते | सेवेते | सेवन्ते |
| मध्यम पुरुष | सेवसे | सेवेथे | सेवध्वे |
| उत्तम पुरुष | सेवे | सेवावहे | सेवामहे |
लोट् लकार — आज्ञार्थक
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | सेवताम् | सेवेताम् | सेवन्ताम् |
| मध्यम पुरुष | सेवस्व | सेवेताम् | सेवध्वम् |
| उत्तम पुरुष | सेवै | सेवावहै | सेवामहै |
लृट् लकार — भविष्यत्काल
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | सेविष्यते | सेविष्येते | सेविष्यन्ते |
| मध्यम पुरुष | सेविष्यसे | सेविष्येथे | सेविष्यध्वे |
| उत्तम पुरुष | सेविष्ये | सेविष्यावहे | सेविष्यामहे |
---
२. लभ् धातु — प्राप्त करना
लट् लकार — वर्तमानकाल
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | लभते | लभेते | लभन्ते |
| मध्यम पुरुष | लभसे | लभेथे | लभध्वे |
| उत्तम पुरुष | लभे | लभावहे | लभामहे |
लोट् लकार — आज्ञार्थक
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | लभताम् | लभेताम् | लभन्ताम् |
| मध्यम पुरुष | लभस्व | लभेथाम् | लभध्वम् |
| उत्तम पुरुष | लभै | लभावहै | लभामहै |
लृट् लकार — भविष्यत्काल
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | लप्स्यते | लप्स्येते | लप्स्यन्ते |
| मध्यम पुरुष | लप्स्यसे | लप्स्येथे | लप्स्यध्वे |
| उत्तम पुरुष | लप्स्ये | लप्स्यावहे | लप्स्यामहे |
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३. रुच् धातु — अच्छा लगना / रुचिकर होना
लट् लकार — वर्तमानकाल
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | रोचते | रोचेते | रोचन्ते |
| मध्यम पुरुष | रोचसे | रोचेथे | रोचध्वे |
| उत्तम पुरुष | रोचे | रोचावहे | रोचामहे |
लोट् लकार — आज्ञार्थक
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | रोचताम् | रोचेताम् | रोचन्ताम् |
| मध्यम पुरुष | रोचस्व | रोचेथाम् | रोचध्वम् |
| उत्तम पुरुष | रोचै | रोचावहै | रोचामहै |
लृट् लकार — भविष्यत्काल
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | रोचिष्यते | रोचिष्येते | रोचिष्यन्ते |
| मध्यम पुरुष | रोचिष्यसे | रोचिष्येथे | रोचिष्यध्वे |
| उत्तम पुरुष | रोचिष्ये | रोचिष्यावहे | रोचिष्यामहे |
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संक्षिप्त परिचय
सेव् — सेवा करना
लभ् — प्राप्त करना
रुच् — अच्छा लगना / रुचिकर होना
इन तीनों धातुओं के लट्, लोट् और लृट् लकार के रूप संस्कृत-विद्यार्थियों के लिए धातुरूप-अभ्यास में अत्यन्त उपयोगी हैं।